मौन खड़े क्यों देख रहे है आज, कल तक थे जो प्रतिभागी
कहाँ गया वो विवेक इन सबमे, क्यों नहीं आज चेतना जागी
याद रहे इसी मौन के कारण युद्ध महाभारत साकार हुआ
जो न रहे होते मौन भीष्म, तो लाज द्रोपदी भी न खो पाती...
मौन मृत्यु है, मौन शत्रु है, मौन है कायरता का अभिप्राय
जो देख अन्याय भी मौन रहे , तो है कलंकित मानव जाती
Ashishprakash poetry