कुछ ईमानदार तो कुछ बेइमान दिखता हूँ
जाने अब मै कैसा हिन्दुस्तान दिखता हूँ
इज़्ज़त है दिल मे हर एक रन्ग्ग् कि मुझमे
फिर भी क्यों मैं सिर्फ एक रन्ग्ग् कि पहचान दिखता हूँ
जाने अब मै कैसा हिन्दुस्तान दिखता हूँ
सियासतो के झग्डो मे उल्झा रहा बचपन मेरा,
जवान् हुआ तो क्यों मरता किसान दिखता हूँ
जाने अब मै कैसा हिन्दुस्तान दिखता हूँ
कभी सैतालिस, चौरासी, तो कभी इकानवे मे टूटता रहा बस् भर् मैं 'प्रकाश'
अब तो सफेदी करा दो मेरी कि एक जरजर सा मकान दिखता हूँ
जाने अब मै कैसा हिन्दुस्तान दिखता हूँ
आशीष प्रकाश