झेल  रहा था रोग मैं अंदर , प्रदेश बना था रोगी रे उम्मीद करि जो भाजापा से,  तो  भेज दिया एक योगी रे पहले जो भैया जी थे वो पापा चाचा किये रहे परिवार वाद  ही चला वहां, तो हम वोट बीजेपी दिए रहे बहुमत से उपजा  जो मद, मदमस्ती में पार्टी झूम गई भ्रष्टाचार पे लड़ी चुनाव,  फिर भगवे पे यू-टर्न घूम गई राम नाम का लेके स्वाद ये फिर से पॉलिटिक्स खेल गए सोचा होगा है वही लोग जो इक्यानवे ब्यानवे झेल गए रही उम्मीद की काम विकास का होगा फिर से यूपी में कहाँ से भगवा ले के आये जाने ये अपनी ड्यूटी में नेता जी अब नहीं वो जनता, लोग हो गए सयाने हैं कहाँ की चीज़ है  कहाँ टिकानी, खूब ये हम भी  जाने हैं नहीं चाहिए मंदिर मज़्जिद , न करना ये एहसान दोबारा क़र्ज़ में रही जमींन  यहाँकी , मरता  रहा किसान तुम्हारा बिजली के युग में  है आजभी  दिए में पड़ता बच्चा है नहीं जला गर बल्ब आज भी, तो विकास का वादा कच्चा है नहीं मांगते बहुत हम अब भी, दे दो बिजली पानी बस खेतो में फिर  लहलहाए सरसो, गाँव में आये रवानी बस साठ साल हो गए आज भी, बैल हैं गिरवी पड़े हुए खेत जोत  के भरे ब्याज ,असल आज भी सिर पे चढ़े हुए सड़को पे जो लगे खड़ंजे, कंक्रीट बनादो  वो  भी अब अब न जो हुई ये पूरी, आस करोगे   पूरी कब योगी जी येही मांग हमारी   अब तो न्याय की सरकार बने बहुत रहा चोटिल ये राज्य, की अब तो सपना साकार बने   Ashish Prakash