हाथ में मशाल लो हिम्मतें सम्भाल लो   कह दो आँधियों से अब थाम अपनी चाल लो   साँस तेज़ तेज़ है शोलों जैसी सेज है   जत्थे बन निकल चलो शोलों को कुचल चलो   लौह को तपा तपा शस्त्र में अब ढाल लो हाथ में मशाल लो   टोलियाँ निकल रहीं आग में बदल रहीं   अब भी मौन शेष क्यूँ भिक्षुकों का भेष क्यूँ   हिम्मतों में आग भर भय को अपने त्याग कर   तीर तरकशों से सारे आज तुम निकाल लो हाथ में मशाल लो