एक टुकडा धूप का, और एक तुम तुम्हारे पास होने के एह्सास कि नर्मी और इस उजले सूरज कि गर्माहट तुम्हारी सुस्त सुबहो कि अंगडाई और उसपे ये सर्द मौसम के झोके किस्को देखे है आस्मा भी इस सोच मे गुम बस एक टुकडा धूप का, और एक तुम