कहीं हाथ मिले कहीं ताली है चहरे पे सभी के लाली है कोई आज न दिल पे ग़ुबार रहे इसलिए धरा रंग डाली है   एक साल की प्यासी आँखो ने फिर आज ये हसरत पाली है किसी राधा को फिर श्याम रंगे फिर आज भी सुननी गाली है