इश्क़ पे सवाल कर
कोई तो बवाल कर
कह रहि हैं मंज़िले
रास्तों पे मुश्किलें
कोशिशें भी रो रहीं
हिम्मतें भी सो रहीं
हौसलें मुहाल कर
कोई तो बवाल कर
इश्क़ पे सवाल कर
ख़ामोश सी सियासतें
न कहीं हैं राहतें
फिर भी ज़िंदा आस है
पर वहाँ उपहास है
अब न महँगी दाल कर
कोई तो बवाल कर
इश्क़ पे सवाल कर
कौन गांधी है यहाँ
काली आँधी है यहाँ
पड़ रहे तमाच हैं
इज़्ज़त्तो पे आँच हैं
अब न दूजा गाल कर
कोई तो बवाल कर
इश्क़ पे सवाल कर