इश्क मे बदनामी का उनहे डर आज भी है
पास न आने कि कसम मुझ पर आज भी है
की अब भी हिचकिया रोकने के लिए कभी ले लेते हैं नाम वो मेरा
सुना है मेरी मोहब्बत का उनपे असर आज भी है
बाज़ारो में बचते फिरते थे जो कभी निगाहों से मेरी
ये भी सुना है की देखने को हमें बेकरार वो नज़र आज भी है
हो भी जायेन्ग्गे किसि और के वो, तो भी क्या
उनकी बेवफाई कि बाज़ारों मे खबर आज भी है
यकीन नहीं हो तो तुम देख लो आके एक बार
'प्रकाश' का जुदाई से वही हशर आज भी है
आशीष 'प्रकाश '