संसार

नीला – पिला - हरा गुलाबी ,यह कैसा संसार है

पतझड़ में पत्ते झरते है ,सावन इन पर महरबान है

फूलो की मनमोहक खुशबु ,से बढ़ता यहा प्यार है

ची – चियाती चिडियों का ही तो ,यह पावन संसार है

नीला – पिला - हरा गुलाबी ,यह कैसा संसार है

सुबह – सुबह कोयल की मधुर ,ध्वनि गुंज जाती है

मन को मेरे हर्षित कर वो, आसमा में उड़ जाती है

देखो – देखो वृक्षों का, ये कैसा आकर है

नीला – पिला - हरा गुलाबी ,यह कैसा संसार है

अदृश्य कहा हो गये वृक्ष, मुझको तुम बताओ ना

खतरे में जन - जीवन है, पुनः वृक्ष लगाओ ना

मत काटो तुम जंगल को , इसमें प्राण वायु आपार है

नीला – पिला - हरा गुलाबी ,यह कैसा संसार है

© आशीष कुमार पाण्डेय