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            संसार

नीला – पिला - हरा गुलाबी ,यह कैसा संसार है

पतझड़ में पत्ते झरते है ,सावन इन पर महरबान है

फूलो की मनमोहक खुशबु ,से बढ़ता यहा प्यार है

ची – चियाती चिडियों का ही तो ,यह पावन संसार है

नीला – पिला - हरा गुलाबी ,यह कैसा संसार है

सुबह – सुबह कोयल की मधुर ,ध्वनि गुंज जाती है

मन को मेरे हर्षित कर वो, आसमा में उड़ जाती है

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