मै सोचता हूँ ,की वो किसी मोड़ पर दिख जाये|

मुझको देखे ,और थोड़ा सा मुस्कुराए||

वो साड़ी में कैसी लगती होगी, वो घडी की जगह चूड़ियाँ कैसे सजती होगी|

क्या वो मुझसे मिलेगी ,और गले लग जाएगी,

या मुझको देखते ही वहाँ से चली जाएगी ||

पर कही वो मुझे भूल ना जाये |

मै सोचता हूँ की वो किसी मोड़ पर दिख जाये||

वो दो चोटी वाले बाल, आज खुले होगें ना |

वो आँखो में सुरमा , होंठो में लाली होगी ना ||

अब वो किसी और की, घरवाली होगी ना |

क्या वो यहाँ आकर बगीचे में आयेगी,                 

मेरे बारे में सोच कर , अपने आँसुओ को बहायेगी ||

क्या वो मुझको, अब भी अपनी मोहब्बत कहती होगी |

या एक बुरा समय सोचकर ,भूलजाने की कोशिश करती होगी ||

पर मै सोचता हूँ की,कही उसे मेरा एक पुराना खत मिल जाये |

मै सोचता हूँ की, वो किसी मोड़ पर दिख जाये||