हे नारी!

पल- पल हर पल तुम नारी का ,सम्मान करना सीख जाओ

नारी शक्ति का तुम, पहचान करना सीख जाओ

रात अँधेरी सड़को पर, जिनपर तुम व्यंग कसा करते हो

हुनकारों के साथ जिन पर, अपना हाथ धरा करते हो

हे पुरुष! तुम भी ,यह बात समझ जाओ

पल- पल हर पल तुम नारी का ,सम्मान करना सीख जाओ

की ! मन में डर और लज्जा का, जो भाव उस समय आता है

पीड़ित ह्रदय अपनी गाती से, तेज बढ़ता जाता है

हे नारी! अब तुम युग की, परिवर्तन धारा बन जाओ

खुद को सशक्त कर के, निडरता से बढ़ती जाओ

अंधियारे से ना डरो, चिराग वहा भी जलाओ

पल- पल हर पल तुम नारी का ,सम्मान करना सीख जाओ

नारी ममता की मूरत है, पर चंडी का रूप भी दिखाओ

अश्रु से भीगे आंचल में ,जो सपनो को छिपाया है

आंचल को सुखा कर ,सपनो को साकार कर जाओ

बंजर धरती पर जो तुमने, फूलो को उगाया है

मान मर्यादा और सम्मान का, जो समन्वय बनाया है

हे नारी! अब तुम, स्वयं सशक्त हो जाओ

और जीवन की हर दिशा में, अपने कदमों को बढ़ा

पल- पल हर पल तुम नारी का ,सम्मान करना सीख जाओ


© आशीष कुमार पाण्डेय

ईमेल – ashishpandey01155@gmail.com