आयो आज फिर से बात करते हैं ,
साथ गुजारे थे जो लम्हे , उन्हें चांद की रोशनी तले कहीं याद करते है...।
मंजिल मिले न मिले ,
पर जिन रास्तों पर गुजरे थे साथ , हाथ पकड़े कभी
उन रास्तों पर फिर से साथ चलते हैं ...।।
आयो आज फिर से बात करते हैं..।।।


आयो आज फिर से बात करते हैं ,
साथ गुजारे थे जो लम्हे , उन्हें चांद की रोशनी तले कहीं याद करते है...।
मंजिल मिले न मिले ,
पर जिन रास्तों पर गुजरे थे साथ , हाथ पकड़े कभी
उन रास्तों पर फिर से साथ चलते हैं ...।।
आयो आज फिर से बात करते हैं..।।।