“कहाँ गयी वो चंचलता, कहाँ गयी वो अस्थिरता” 

जैसे बादल गरजा करते, बैसे वो सम गरजा करती

जैसे बरखा बूंदे नाचे, घर भरमें वो नाचा करती

घूम घूम कर गाना गाती, जैसे कोयल कू-कू करती


“कहाँ गयी वो चंचलता, कहाँ गयी वो अस्थिरता” 

आँगन में वो चहका करती फूलो सी वो महका करती

प्यार के पद पथ पर चलती, दिल में घर कर जाती थी

जैसे नागिन नाचा करती, वैसे सम लहराती थी


“कहाँ गयी वो चंचलता, कहाँ गयी वो अस्थिरता”

 जैसे मेमन कृन्दन करता, वैसे सम इठलाती थी

अपनी इस अस्थिरता से, मोह भंग कर जाती थी

बात बात पे टोका करती, लड़ती और झगड़ती थी


“कहाँ गयी वो चंचलता, कहाँ गयी वो अस्थिरता” 

सुर से सुर बहता था, बातो से बाते करती थी

मन मस्तमगन हो जाता था, दिल मस्तमगन हो जाता था

जय वीरू की जोड़ी देखो , कह कह कर हमें चिढ़ाती थी “कहाँ गयी वो चंचलता, कहाँ गयी वो अस्थिरता”