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स्वर्गीय प्यारी बहन

“कहाँ गयी वो चंचलता, कहाँ गयी वो अस्थिरता” 

जैसे बादल गरजा करते, बैसे वो सम गरजा करती

जैसे बरखा बूंदे नाचे, घर भरमें वो नाचा करती

घूम घूम कर गाना गाती, जैसे कोयल कू-कू करती


“कहाँ गयी वो चंचलता, कहाँ गयी वो अस्थिरता” 

आँगन में वो चहका करती फूलो सी वो महका करती

प्यार के पद पथ पर चलती, दिल में घर कर जाती थी

जैसे नागिन नाचा करती, वैसे सम लहराती थी


“कहाँ गयी वो

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