सपनों की मंजिल's image
Share0 Bookmarks 65150 Reads1 Likes

सपनों की मंजिल


देखे थे सपने हकीक़त से वास्ता न था

देखे साकार हो ऐसा कोई रास्ता न था


दिन गुजरे प्रतीत हुआ एक पथ

जाने को जहाँ कोई रास्ता न था


साकार करने को जागी उमंगे अंतर्मन में

पर ह्रदय से उसका कोई वास्ता न था


ले दृङ संकल्प चल पड़े उसी ओर

अभी तक जहाँ कोई रास्ता न था


<

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts