कृष्ण प्रेम की धरती जो थीकंश कलंकित होती जायपरम ज्ञानी ज्ञान बोध सेजनते शिशु ही समाज सिखाय
कृष्ण प्रेम की धरती जो थीकंश कलंकित होती जाय
परम ज्ञानी ज्ञान बोध सेजनते शिशु ही समाज सिखाय