शब्द ही ख़ुशी शब्द ही गम

शब्द ही पीड़ा शब्द ही मरहम 


शब्द ही शब्द से प्यारे

शब्द ही शब्द से न्यारे


 भद्र अभद्र का झोल है जग में

फिर भी चलती दुनिया सारी


 जहाँ भद्र अमृत बहाये  

वहीँ अभद्र श्राप दिलाये


 जहाँ भद्र खुशियां बांटे

वहीँ अभद्र व्यथा बढ़ाये 


जहाँ भद्र मरहम बनाये

वहीँ अभद्र घाव बढ़ाये


 जहाँ भद्र मेल बढ़ाये

वहीँ अभद्र बैर कराये