तलाक- तलाक के झंझट में.

क्यों जन-जन को बहलाते हो I

खुद की छोड़े बैठे हो

नारी सम्मान दिलाते हो


 ह्रदय घात लग जाती hai

जब खाते ज़ीरो शेष दिखाते

आधार पैन की लिंकिंग में

क्यों खाते सीज करते हो 


करके वादे जनता से कि

हम नयी क्रांति लाएंगे

मेक इन इंडिया स्लोगन दे

चाइना सब बिकवाते हो


 दुश्मन-दुश्मन फ़्लैश करा के

अगले को उकसाते हो

घ्रणित भावना को भर के

आतंकी और बढ़ाते हो 


जो सोच-सोच कर जनता ने

P.M तुन्हे बनाया था

नोट-GST के चक्कर में

क्यों उनको तुम सताते हो


मंदिर निर्माण का मुद्दा ले

अपनी सरकार बनाते हो

हिन्द आस्था को भी क्यो

घसीटे राजनीति में जाते हो 


जन जन आपसे करे आग्रह

ऐसा कोई उपचार निकालो

विश्व में अपनी दस्तक हो

दुश्मन भी नत मस्तक हो