प्रकृति प्रकोप's image
239K

प्रकृति प्रकोप

सौर्य स्वर्णिम रचना जो प्रभु 

धूधू धुमिल अब होती जाय 

सुखी भविष्य के लोभन म् 

कल पे आजय देई गमाय 


प्रभु कह पथ भूलि भालि के 

जस जग मानव ज्ञान बढाय 

जीवन रक्षक छोंडि छांडि के 

बिशुद्ध बिलासिता को अप

Tag: poetry और2 अन्य
Read More! Earn More! Learn More!