अब चाहें हम जीते, या न जीते,

कदम अब पीछे, न हटाएंगे हम I


चाहें हँसे जमाना, कितना भी हमपे,

फिर भी कोशिश, करते जायेगे हम I


 मिले चाहें दुःख, राहों में कितना,

फिर भी मुड़के, न आएंगे हम I


आज हँसते हैं, लोग जो हम पे,

उनको भी आईना, दिखाएंगे हम I


 गर जमाना जले, तो जलता रहे,

कोशिश पे कोशिश, करते जायेंगे हम I


जो जलते है लोग, हमसे आज,

उनको और भी, जलायेगे हम I 


पड़ जाये हिमालय, भी गर राहों में,

तो उस पे भी, चढ़ जायेंगे हम I


अपनी मंजिल को, पाने के खातिर,

कितने भी दर्द को, सह जायेगे हम