मंजिल तुम्हें गर जो पानी हो
करो निर्धारित लक्ष्य को तुम
दृष्टि गड़ा दो लक्ष्य पे ज्योंही
कर निश्चय पग बढ़ा दो तुम
फूलों के संग में ही कांटे होते
कांटो संग में ही ख़ुशबू होती
पास ख़ुशबू तक गर जाना हैं
तो कांटो पर चल जाना है
दीपक के संग ज्योति होती
ज्योति के संग अंगारे होते
अंधकार गर है मिटाना तो
ज्योति जस जल जाना है
गर रौशन किस्मत करनी है
दीपक जस तो जलना होगा
मंजिल जो गर पानी हो तो
कर्म- पथ पर तो चलना होगा
देख लक्ष्य फिर साध निशाना
मेहनत का तू बाण चला दे
श्रम सागर में लगा ले गोता
जीवन स्वप्न के मोती पा ले
राह में तेरी कंकड़ भी होंगे
बिच-बिच पत्थर आजायेंगे
दृढ़ शक्ति मज़बूत तू रखना
पग हिमालय तब चढ जायेगे
सत्य कर्म पथ, गर चलेगा तू तो
मुस्किल राहें सब मिट जायेगी
चूमेगी कामयाबी कदम तुम्हारे
मंजिल खुद ही तुम्हें बुलायेगी


