बीमारी नहीं तो उसका डर मार देगा
ये मातम का माहौल, खबर मार देगा।
टीवी अखबार से रखेंगे तुम जितनी दूरी
समझो तबियत आपकी उतनी संवरी सुधरी।
हालात गंभीर है ये तो सब ही जानते है
फिर भी बिना फैलाए वो कहा मानते है।
वीडियो में हॉस्पिटल, तस्वीरों में शमशान
देख डोल जाता रहा है स्वस्थ से स्वस्थ इंसान।
फिर भी खबरे आती है कर देती है हैरान
एक तरफ सब है पीड़ित, है कितने परेशान।
एक तरफ देखो धूधूकर जल रहा है हिंदुस्तान
इसमें भी रोटियां सेंकने लगे है कुछ तुच्छ इंसान।
हां सच है मृत्यु हुई है बहुतों की इस विपत्ति में
कितने के शरीर मरे, कितनो के मर गए ईमान।
एक दूजे को कोसने में लगे सारे सियासतदान
समस्याएं गिनाने में व्यस्त, समाधान से अंजान।
माना विपत्ति बड़ी,सामने संकट की घड़ी है
पर असल मानवता दिखाने का वक्त यही है।
