शिव ...

आदि भी तू, अंत भी तू..

शुन्यता में छिपा अनंत भी तू,

तू ही अर्द्ध, परिपूर्ण भी तू,

तू ही सत्य,और मिथ्य भी तू,

तेरी जटा से बहती गंगधारा,

तेरे ही चरणों मैं बनता- मिटता जग सारा, तेरे ही इशारे पर डोले चंद सितारा,

तेरी ही भक्ति में झूमे जग सारा,

तेरी राह पर...

तेरी राह पर खुद को में हारा,

भोलेनाथ ... थाम ले मुजे ..

एक तू ही मेरा सहारा। ।

-आशीष सोनी