ना जाने कौन थी वो
बस इतना पता है ख्वाहिशें उसकी भी रही होगी
सपने उसके भी होंगे
शायद क्या पता कभी उड़ना भी चाहती हो
हाँ बस किसी से सुना था हमने और शायद रोज़ ही सुनते आए है
कि "हाँ ,साहिब शायद कुछ गलती उसकी भी रही होगी "
बस यही सुनते आए है हम
कभी वो सीता थी कभी द्रौपदी कभी निर्भया तो कभी गुड़िया
लेकिन हम कभी ये समझ नही पाए कि वाकई में थी कौन वो
क्या वजूद था उसका इस समाज मे
कि किसी की बेटी किसी की बहन किसी कि पत्नी या किसी की माँ ।।
क्या कभी उसका खुद का कोई वजूद ही नही था
जिस धरती पर हमने दुर्गा का रौद्र रूप देखा
गंगा की शालीनता देखी
लक्ष्मी और सरस्वती का प्यार देखा
क्या आज यहाँ नारी का वजूद मिटते हुए भी देखा। ।
शायद कुछ हद तक जान चुकी थी वो
और शायद गलती हमारी थी जो हमने मान भी लिया
माना कि उसने कभी सवाल नही किया
और शायद हमने भी उसके हर सवाल को हंस के टाल दिया
कभी दो आँसू बहा लिये ओर कभी कहीं किसी चौराहे पे मोमबत्तियां जला दी
बचते रहे बस उसके सवालो से
गलती क्या थी उसकी
यही की बस वो सब सहती आई
या फिर ये कि वो सबकुछ संभालती आई।।
शायद यही गलती रही होगी उसकी कि शायद वो उन हैवानो औऱ शैतानो को पहचान न पाई।।
न जाति
न मज़हब
न उम्र और
न ही कोई रिश्ता
वो बस सहती गई और चुप रही
शामे ढलती गयी दिए बुझते गए
और वो रोती रही
सवाल करती भी तो किस से करती
और हां उसको तो शायद जवाब मिलना भी लाज़मी न था
कितना ही सेह लेती
और फिर शायद वो कहीं गुम सी हो गई ।।
-goes by the name Skel
-@a_travelling_pahadi


