आसमान ने जी भरकर पानी उड़ेला ज़मीं पर ,मै

मरदूद भीगता खड़ा अश्क़ बहाता रहा ज़मीं पर |


रात भर शमा जलती रही अन्धेरे को गोद बिठाये

मुझे पता नहीं वो सुलाने चली अन्धेरे को अपनी गोद में |


वो मीठी सी हसीं वो छोटी सी नमीं आँखों में

ज़रूर इसका भी हिसाब किया होगा ख़ुदा ने |