दिल की रुहदारियाँ
आज फिर दिल सुबह से परेशां है , सुना है
इसके दर्द को कोई सहला कर चला गया है |
आज सफर कुछ हैरांं है, मन्ज़िल का पता
जो कागज़ पर था तसव्वुर से अलादा है |
आज हवा कुछ भारी है , सुना है
आशिक़ ने हवा में दर्द लिख छोड़ा है |


दिल की रुहदारियाँ
आज फिर दिल सुबह से परेशां है , सुना है
इसके दर्द को कोई सहला कर चला गया है |
आज सफर कुछ हैरांं है, मन्ज़िल का पता
जो कागज़ पर था तसव्वुर से अलादा है |
आज हवा कुछ भारी है , सुना है
आशिक़ ने हवा में दर्द लिख छोड़ा है |