चाँदनी

संगमरमर सा तराशा बदन पर चाँदनी मढ़ी जैसे ,कोई रात 

को अंगोछे में बांध कर चाँदनी सुला गया तेरे चेहरे पर जैसे |


ये कौन मेरी आँखों से जाम पीये जाता है ,साक़ी से 

पूछो उसका नाम मेरे कानों में फुसफुसा के कहे | 


बारिश की चादर में हम भीगते रहे दिन भर ,तेरे रुखसार 

पर लुढ़कती बूँदों को उंगली के पोरों पर सजाता रहा |


मोहब्बत में बर्बाद होना सबसे आसान है ,और

भी ज़्यादा आसान है मोहब्बत में मुकर जाना | 



किसकी रात जली फिर मय -ख़ाने में , फिर  

किस को ग़म -गुसार करने का मौका मिल गया | 


रस्ते में पत्थरों को ठोकर मारता चला गया ,सुना

है ठोकरों से दिल को बहुत सुकून मिलता है | 


जब बर्बाद होना हो चली आना मेरे पास ,तुझे बे-इन्तिहा

मोहब्बत करुँगा की पूरे क़ायनात में अकेली हो जायेगी |