रणभेरी  सुन  बोला, वीरों  मातृभूमि  पर संकट है अरि सेनाओं से घिरा राज्य ये समय बड़ा विकट है चमकी दामिनि  सी  तलवारें, धनुष  बाण लहराए बोला सेनापति  हुंकार के, कोई शत्रु  ना जाने पाये हर बात सुनो मेरी  सेनानी, रण में नाम  डुबोना मत प्राण जाएं तो चले जाएं,सम्मान कभी तुम खोना मत सेनानी बोला बढ़ा जिधर से अरि मस्तक वहीं गिरेगा जब तक है रक्त धमनियों में ये सैनिक नहीं हिले गा जो बात आ गयी साहस पे तो यम से मैं टकराऊं गा साक्ष्य चाहिए तो काली के खप्पर को भर लाऊं गा इन घावों का, इन बाणों का स्नेह मुझे जो प्राप्त हुआ धरा बनी इतिहास युगों तक जहाँ कहीं अरिघात हुआ जय महाकाल के घोष से कोई संकट ना आने पायेगा शक्ति भवानी से सेनानी अरि दल को काट गिराए गा मातृभूमि की लाज बचाने, नाम अमर कर जाऊं गा शक्तिपुंज की ज्वाला बन मैं आज कहर कर जाऊं गा।।