' ऊँ नमः शिवाय '

जब भी पथ में चलते चलते, कदम मेरे थक जायें।

अँधियारा रोके रस्ते को, साँसें साथ छुड़ायें।।

ध्यान तेरा न छूटे मन से, जिह्वा रटती जाये।

'ऊँ नमः शिवाय,जपो 'ऊँ नमः शिवाय '।।



दृष्टि दया की रखना बाबा, सुख हो चाहे हो दुःख ।

मैं अबोध गर भूलूं जग में,याद दिलाना प्रभु खुद ।।

जैसे नदिया घूमे दर दर, पर सागर है अपनाय।

हर पल मन मेरा गाय, 'ऊँ नमः शिवाय '।।


तेरी दया से भोले शंकर, कण-कण शंकर कहाते ।

भूत, प्रेत, श्मशान, भाँग भी, तुमसे मान हैं पाते ।।

गंगा बनी मुक्ति की धारा, शशि लिया सीस बसाय।

हर पल मन मेरा गाय, ' ऊँ नमः शिवाय '।।


जग वाले जब ना अपनाते ,देते तुम ही सहारा।

सबको देते तुम ही ठिकाना, हो जीता या हारा ।।

मैं भी उनमें से ही इक हूँ, तेरी कृपा जो पाय।

हर पल मन मेरा गाय, 'ऊँ नमः शिवाय '।।


ऋषि, मुनी,ज्ञानी,औघड़,जन ,जपते नाम की माला।

अमृत बाँटा सबको प्रभु जी, खुद कालकूट पी डाला।।

मैं भी हूँ इस जग का हलाहल, शरण तुम्हारी आय।

हर पल मन मेरा गाय, 'ऊँ नमःशिवाय'।।


आदि तुम्हीं हो अन्त भी तुम ही, सबपे दया हो करते ।

हर-हर जाप से दुःखों को हरकर,डमरू से आशा भरते।।

आशुतोष तुम, मैं हूँ अकिंचन, लो मुझको अपनाय।

हर पल मन मेरा गाय, 'ऊँ नमःशिवाय '।।