जय माता की
हर पल बरसे कृपा तुम्हारी,
मैं अबोध कब जानू।
जब भी संकट हो जीवन में ,
माँ तुमको पहचानू।
नौ दिन के नौ रूपों से माँ,
मन को मिलता संबल।
तू ही माँ निर्धन का धन है,
तू ही निर्बल का बल ।
दुःख से सुख का ये रस्ता,
बिन तेरे कब कटता।
बिना दया के कब मेरी माता,
रोता बालक हँसता ।
गाऊँ निश दिन तेरी भक्ति,
पाऊँ मैं खुशहाली ।
शीश तुम्हारे चरणों में नत,
जय माँ शेरावाली।
