ईश्वर
(प्रश्न )
ये धूप कौन बिखराता है ?
बारिश को कौन बुलाता है?
है चाँदनी भरता कौन यहाँ ?
हमको तो समझ न आता है।
ये कौन है जो सुर भरता है,
काली कोयल के गानों में ?
कोई तो भरता गीत मधुर,
पपीहे के मस्त तरानों में?
(उत्तर)
जिसकी रचना, तारे, नदियाँ,
झरने पर्वत,हिमगिर,चिड़ियाँ।
नीला अम्बर जल सिन्धु भी ,
हैं रंग भरी कोमल कलियाँ।
सारे जग का है सृजन करे,
रचना जिसकी विस्मय से भरे।
पालन करता जो सबका है ,
जन्म-मरण से जो है परे।।
जिसकी इच्छा से लय-सरजन,
जिसकी कृपा से सुखमय जन।
जो रचता है सब सृष्टि को,
चाहे हो जड़ या हो चेतन।।
जिसकी आँखें सूरज चंदा ,
जिसकी ममता रिमझिम बरखा।
जिसकी करुणा है सतरंगी ,
जो अजर अमर सुखधाम सदा।।
है नमन प्रथम उस ईश्वर को ,
उस परमपिता जगदीश्वर को ।
जिसके होने से ही हम हैं ,
उन 'ब्रह्मा' 'विष्णु' 'महेश्वर' को।।
✍आशीष
(एक नन्ही बालिका के सहज प्रश्नों से उपजे भाव)


