'हे नाथ'
आँखन को तुम न दिखे, बस होते तुम महसूस,
तुमसे फैले चाँदनी, तुमसे फ़ैले धूप।
तुममें शामिल रंग सब, तुम धरती आकाश,
सागर तुझसे है भरा, तू ही जग का प्रकाश।
जड़ चेतन में तू रमा, तेरे ही सब रूप,
तेरे नाम अनन्त हैं, तेरे रूप अनूप।
तुममें सारी आश है, बिन तेरे क्या हाथ,
जग में जीवन प्राण तुम, दीनबंधु हे नाथ।
आशीष
