सूरज ढलने की बात हो रही,

अब चाँद देखने की बात हो रही,

ये मोहब्बतों का दस्तूर भी ऐसा ही है,

पहले दिल देने की बात हो रही

अब दिल चुराने की बात हो रही

सूरज की तपिस भी व्यर्थ रही

और चाँद दाग़ होके भी चाहत बन गया,,,

ये उल्फ़त(इश्क़ )है ही ऐसी

पहले अनुराग (प्रेम) को उठाने की बात हो रही,

फिर गिराने की बात हो रही.!!!!!!!

~~~~सेंगर