सूरज की भड़कती चिंगारी हो,

हवा ने भी जुल्फ तेरी सवांरी हो।

सुबह की ओस हार बने तेरा,

सांसों में हल्की सी बेकरारी हो।

अचानक से आ जाए फिर घटा,

जैसे प्रकृति ने मुस्कान बिखेरी हो।

चिड़ियों का कलरव चलता रहे,

चेहरे पे रात की जगी खुमारी हो।

तेरे केश पास में छुपी सुगंध,

से सारी दुनिया तारी हो।

तुम मुझको सोचा करों,

मेरा भी प्रेम ख़याली हो।

मिलें प्रिये हम दोनों मेघो में,

धड़कन की धड़कन भी भारी हो।

तेरा घर भी मेरा घर भी,

दोनों में ऋतुएं सुहानी हो।

हम दोनों मिलें पर ऐसे,

जैसे प्रेम का काम जारी हो।

मैं तेरा प्रीतम हूं प्रिए,

तुम भी जान हमारी हो