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शब - ए - ज़ुलमात


जीने के लिए ये तसल्ली ही काफी हैं,की इश्क़ कुछ अभी भी बाकी हैं।

जिन्दगी ख़तम करने में तो पल भर का सफर हैं।पर अभी तो पूरी शब - ए - जुल्मात बाकी हैं।

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