जो भी हैं आघात हैं दिल पे मेरे दाग हैं,
ये नमी आंखों की मौसिकी की आग हैं।
कितना और लंबा जाएगा ये इम्तेहान,
कितना और लंबा अभी इंतज़ार हैं।
इक खुदा के भरोसे न थे कभी न होगे,
मैं जिंदा हूं अधूरा सा पूरा तो तेरा दीदार हैं।
मेरी जिंदगी के सबब मेरे बाद रकीब जानेंगे,
कैसी ये बेखुदी कैसा बेतुका बेजार हैं।
तेरे हवाले जा रही तुझसे रूह अमल रही,
जाते वक़्त जो न रो पड़े तो क्या कोई प्यार हैं।
ये बदमिजाज शामें अब मेरे बाद नहीं होगी,
ये आना जाना नया नहीं ये तो बस संसार हैं।
इक छोड़ते हैं इक पातें हैं,
ये नया खिलौनों का बाज़ार हैं।


