नारी जब उठाएगी आवाज़
नारी पे हुए अत्याचारों की
नारी जब कुचलेगी अंहकार
सब कुरीतियों के
नारी एकत्रित होंगी जब नारी के लिए
घर, जाति, सियासत को परे रख के
उठेगी आवाज़ जब नारी के लिये
तब सब जुल्मों को घुटने टेकने होंगें
देर है बस नारी को एक दूजे के दर्द
समझने की ।
~आर्यन कुमार

