स्वप्न की आस, मुश्किलें तमाम नींद को रोज़ बुलाती हैं वक़्त ठहरा रहता है रात आकर लौट जाती है बधाई क्यों दे रहे हो कुछ ख़ास है क्या ! कमाल है रात तो हर रात आती है अच्छा नई साल आ गई, तो क्या हुआ ! हमारे लिए ऐसी नई साल हर साल आती है पूछ रहे हो परेशान क्यों हैं रहने दो ! तुम्हें बता देने से परेशानी नहीं जाती है