कितना कठिन होता है चढ़ना
कितना आसान होता है उतरना
कितना कठिन होता है पाना
कितना फिज़ूल होता है खोना
कितना कठिन होता है पाना
कितना अजीब होता है न पाकर भी चाहना
कितना कठिन होता है पाना
कितना आसान होता है पाकर भी छोड़ना
कितनी कठिनाई देता है चलते रहना
कितना अजीब होता है मुड़ जाना
कितनी कठिनाई देता है थकना
कितना अजीब होता है रुकना
कितनी कठिनाई देता है समंदर में तैरना
कितना अजीब होता है किनारे से पहले डूबना
कितनी कठिनाई देता है हर क्षण पिसना
कितना अजीब होता है घावों का रिसना ।।
असल में
जितना सादा समझ सकते हो
उतना सादा नहीं है जीवन
थोड़ा मुश्किल, थोड़ा खुशदिल
सीधा-सादा नहीं है जीवन ।।


