जब तक.. गंगा के घाटों पर पानी बहता रहेगा मुझे तुम याद रहोगे जब तक.. चाँद बेखबर,बेसब्र दौड़ता रहेगा आसमानों पर मुझे तुम याद रहोगे जब तक.. अमराइयों में धूप-छावं की लुका-छुपी रहेगी मुझे तुम याद रहोगे हाँ, मुझे तुम याद रहोगे के.... वक़्त के छोरों तक मैं वहाँ तक ले जाऊंगा तुम्हारी याद को जहाँ, सिर्फ हम दोनों ही हों जब तक.. रेशमी धागे,गुंथते रहेंगे उनी धागों से,नरम हाथों के सायों में मुझे तुम याद रहोगे याद रहोगे मुझे तुम जब तक .. बारिशों में मैं भीगा करूँगा जब तक.. मेरे हाथों में लकीरें रहेंगी मुझे तुम याद रहोगे जब तक... साथ रहेंगे; दर्द और मरहम... बरसातें और पपीहे रातें और जुगनू दीवारें और कीलें धूप और छाँव मुसाफ़िर और सफ़र और हाँ... तुम अपनी याद में मेरी इक जगह रखना.. क्योंकि... जब तक मुझे तुम याद रहोगे.. मैं भी शायद तुम्हें याद रहूँ