तुम अभी भी
वहां तक नहीं आये
जहां तुम प्रेम पा सको
वो प्रेम जिसे सब
अलग-अलग देखते हैं
किसी को कृष्ण से प्रेम है
तो किसी के लिए...
प्रेम ही कृष्ण है
राधा,रुक्मणी,मीरा भी कृष्ण हैं
और कृष्ण भी, कृष्ण है
परंतु तुम इसे कैसे पा सकते हो
तुम इसे नहीं पा सकते
तुम शब्दों के आदी हो,
बिम्बों को देखते हो
शरीर,शब्द ढ़ूढंते हो
वाक्यों में से अर्थ निकालना चाहते हो
प्रेम का अर्थ...
बहुत ही निर्थरक प्रयास है
प्रेम का अर्थ ढूंढना
प्रेम निशब्द है
कृष्ण की भांति...
कृष्ण की भांति चंचल है प्रेम
अभी और प्रयास करो
परन्तु, केवल किसी एक के लिए