कौन सा उम्र भर चलना है उसे साथ मेरे
लगता है वो कहीं न कहीं सब्र कर लेगा
शक-ओ-शुबह सही ये मेरे दिल का,पर
वो मुझ मासूम के साथ कैसे गुज़र कर लेगा
कल ही देखा था उसे कुछ चीज़ों के साथ
लग रहा है कहीं तो वो अपना घर कर लेगा
अब और कहें क्या तुमसे उसकी,नादाँ(न)
हमें क्या पता था वो अपना खुदा ही बदल लेगा