यादों का सैलाब जब भी आता है।
किनारा नही ढूंढता दिल, डूबना ही भाता है।।
विरासत है तेरी यादें, ओ लम्हें, सभी वादे।
भला कब छोड़ते है, हस्ती को कोई भी शहजादे।।
जो बीत गयी सो बात गयी, सब लोग कहते है।
पपीहा क्यों विरह में मेघ के, नौ माह रहते है।।
दिन दो चार नही उचित, श्रद्धांजलि शहीदों की।
जुबां पर काम हो उनकी, जेहन में यादे जवानी की।।
यादे ही इतिहास है, कुछ लिखती, कुछ मिट जाती है।
इन्हें जतन से जिगर में रख, बुढ़ापे की सब थाती है।।