राधा का प्रेम संग की चाह,

कृष्ण बिना अधूरी राह।

हँसी, ठिठोली, रास की बातें,

संग बिताए सुंदर दिन रातें।


मीरा का प्रेम तप की ज्वाला,

हरि नाम ही जीवन माला।

राजमहल को छोड़ अकेली,

पी गई प्रेम की हाला गहरी।


राधा का प्रेम सुर संग बहता,

मीरा का प्रेम दीप सा जलता।

एक ने पाया संग का साया,

एक ने प्रेम को पूजा बनाया।

राधा के प्रेम में रंग और रास,

मीरा का प्रेम अनंत विश्वास।

@ अरविन्द