चुप्पी तय है,
बोल तय हैं...
मिलना तय है,
बिछड़ना तय है।

राह तय है,
मोड़ तय हैं...
ठहराव तय है,
बहाव तय है।

नज़र तय है,
दृष्टि तय है...
कर्म तय है,
कर्मफल तय है।

क्षण तय है,
क्षणिका तय है...
आना तय है,
जाना तय है।

?
जो होना है —
वो होकर ही रहेगा...
सिर्फ घटित होना ही तय है। ?️

— @अरविंद