नदी
हर मोड़ पर बिखरती है,
और फिर
नया रास्ता बनाती है।
उसे रोका नहीं जा सकता —
हर रुकावट में
एक नई धारा छुपी होती है।
आसमान
हर पल बदलता है —
रंग, रूप, विस्तार।
फिर भी
कभी छोटा नहीं होता।
उसे बाँधने की कोशिश
सिर्फ़ खालीपन लाती है।
कुछ चीज़ें
बस इसलिए सुंदर हैं
क्योंकि
उन्हें समेटा नहीं जा सकता।
उनका बिखराव ही
होता है उनका सौंदर्य।
@अरविंद
