नियति वह राह नहीं जो खुद बनती है,

यह तो है वो लकीर जो तुम खुद खींचते हो।

कर्मों से अपने भविष्य को तुम,

हर दिन एक नया आकार देते हो।

सपनों की उड़ान भरने के लिए,

तुम्हें ही पंख फैलाने होंगे।

हार और जीत का फैसला भी,

तुम्हें ही खुद से करना होगा।

अपने ही हौसले से तुम,

हर मुश्किल को पार करोगे।

खुद पर जो यकीन रखोगे,

तो असंभव को भी संभव करोगे।

यह सफर है तुम्हारा,

और तुम ही हो इसके साथी।

हर कदम पर सीखना है,

यही तो है असली जीवन की थाती।