निशा का नाम है चाँदनी सी रात,

जैसे चाँद हो, हो उसकी बात

गहरी अंधेरी स्याही में बसी,

ख्वाबों की नदियाँ वो बहाए सदा


हर पल में एक ख़ामोशी सी छुपी

दिलों में छुपी एक अद्भुत नमी

आती है वो, और सारा जहां

संग अपने ले जाती है दूर जहाँ


निशा है जैसे सर्द हवाओं की राह

जहां छुपे हैं कई सवालों के साथ

कभी वो मुस्कान, कभी वो ग़म

रात की छांव में बसी हो जैसे हम


हर नज़र में एक राज़ समेटे

निशा अपने आस पास से सियाही हटाए

यादों के मोती संजोकर रखे

जो कभी न ओझल हों, कभी न टूटे

कभी न झुके।