मैं तुम और वक्त कभी एक साथ बैठ ही नहीं पाए

कभी जब हम एक साथ होते थे वक्त कम पड़ जाता था

मैं वक्त लेकर आता था तुम व्यस्त रहती थी

तुम वक्त जब निकालती थी मैं मजबूर रहता था


आज मैं भी उपलब्ध हूं तुम भी उपलब्ध हो और वक्त ही वक्त है

बस वो ही नहीं है वो कहीं नही है देखो बदलता वक्त कितना कमबख्त है!!!



*शब्दाशं*