मैंने पाठशाला में सभी विषयों में
पढ़ कर सर्वोत्तम अंक पाए थे
मां बाप ने पलकों पे बिठा कर पाला था
पर जिन्दगी में आकर,कर्मशाला की भूमि पर
जितने भी इम्तिहान जिन्दगी ने लिए
सभी में शर्मिंदगी ही उठानी पड़ी
काश पलकों पे नहीं, कठिनता से पाला होता मुझे!!!
*शब्दाशं*
