इसे विडंबना कहूं अचरज कहूं या फितरत कहूं कि औरत को अपने जीवन में बहुत ही कम पुरुष पसंद आते है और आश्चर्य यह है कि पुरुष अपने जीवन में बहुत ही कम औरतों को नापसंद करता है।*शब्दाशं*
इसे विडंबना कहूं अचरज कहूं या फितरत कहूं कि औरत को अपने जीवन में बहुत ही कम पुरुष पसंद आते है और आश्चर्य यह है कि पुरुष अपने जीवन में बहुत ही कम औरतों को नापसंद करता है।
*शब्दाशं*